लखनऊ। विचार क्रांति ज्ञान यज्ञ अभियान के अंतर्गत गायत्री ज्ञान मंदिर द्वारा एक महत्वपूर्ण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन सम्पन्न हुआ। अभियान के तहत जन्तु विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खंडों का 458वाँ युगऋषि वाङ्मय स्थापना समारोह विधिवत संपन्न किया गया।


कार्यक्रम में श्रीमती सावित्री शर्मा ने अपने पूज्य सास-ससुर स्व. श्रीमती देवकी शर्मा एवं स्व. रविलाल शर्मा की पावन स्मृति में यह अमूल्य साहित्य विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय को भेंट किया। साथ ही संकाय सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं को ‘अखण्ड ज्योति’ (हिंदी) पत्रिका भी प्रदान की गई।
“ऋषि का सद्साहित्य जीवन की गरिमा का बोध कराता है” – उमानन्द शर्मा
वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक श्री उमानन्द शर्मा ने अपने संबोधन में कहा,
“ऋषि का सद्साहित्य मानवीय जीवन की गरिमा का बोध कराता है और व्यक्ति के चिंतन को उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित करता है।”
इस अवसर पर श्रीमती उषा सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता कनौजिया ने इस ज्ञान-भेंट के लिए आभार व्यक्त किया तथा डॉ. कल्पना सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में गायत्री ज्ञान मंदिर के प्रतिनिधि श्री उमानन्द शर्मा, श्रीमती उषा सिंह, श्रीमती सावित्री शर्मा, श्री देवेन्द्र सिंह सहित विभाग के प्राध्यापकगण—डॉ. अमिता कनौजिया, डॉ. मोनिशा बैनर्जी, डॉ. कल्पना सिंह एवं अन्य संकाय सदस्य तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।


यह आयोजन न केवल साहित्य स्थापना का प्रतीक बना, बल्कि युवा पीढ़ी में नैतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के संवर्धन की दिशा में एक सशक्त कदम भी सिद्ध हुआ।
रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, गुजरात प्रवासी न्यूज, अहमदाबाद

