रिपोर्ट: अश्विन अग्रवाल, गुजरात प्रवासी न्यूज, अहमदाबाद
गुजरात की राजनीति में उमरेठ विधानसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां—कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा—पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरती नजर आ रही हैं। यह चुनाव न केवल स्थानीय बल्कि राज्यस्तरीय सियासी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
हाल ही में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के गुजरात दौरे के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई थीं, वहीं अब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal का 26 मार्च का प्रस्तावित दौरा राजनीतिक माहौल को और गर्म कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल अपने दौरे के दौरान वरिष्ठ नेता जयंत बोस्की (बोक्सी) से मुलाकात कर सकते हैं। इससे उनके आम आदमी पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। यदि ऐसा होता है, तो पार्टी उन्हें 23 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव में उम्मीदवार बना सकती है।
जयंत बोस्की का राजनीतिक अनुभव इस सीट को और दिलचस्प बनाता है। वे 1990 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधायक बने थे और बाद में 2007 तथा 2008 में एनसीपी से जीत हासिल कर चुके हैं। हालांकि 2017 में उन्हें भाजपा के Govind Parmar के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
उमरेठ सीट कांग्रेस के लिए वापसी का एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। आनंद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट पर कभी कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से केवल आंकलाव सीट कांग्रेस के पास है, जहां प्रदेश अध्यक्ष Amit Chavda विधायक हैं।
कांग्रेस खेमे में पूर्व केंद्रीय मंत्री Bharatsinh Solanki का नाम संभावित उम्मीदवार के रूप में चर्चा में है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
भाजपा भी इस उपचुनाव को गंभीरता से ले रही है। प्रदेश प्रवक्ता Anil Patel के अनुसार, पार्टी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले और प्रशासनिक अनुभव वाले उम्मीदवार को मैदान में उतार सकती है।
गौरतलब है कि यह सीट पूर्व विधायक गोविंद परमार के निधन के कारण रिक्त हुई है, जिससे सहानुभूति फैक्टर भी चुनाव में भूमिका निभा सकता है।
उमरेठ विधानसभा क्षेत्र में कोली ठाकोर और पाटीदार समुदाय का विशेष प्रभाव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस उपचुनाव में ओबीसी और पाटीदार वोट बैंक निर्णायक साबित होंगे।
यदि AAP पाटीदार चेहरे पर दांव खेलती है, तो कांग्रेस कोली ठाकोर समुदाय को साधने की रणनीति अपना सकती है, जबकि भाजपा अपने पारंपरिक संगठन और वोट बैंक पर भरोसा करेगी।
आम आदमी पार्टी पहले ही विसावदर उपचुनाव में Gopal Italia को उम्मीदवार बनाकर जीत हासिल कर चुकी है। अब पार्टी उसी रणनीति को उमरेठ में दोहराने की तैयारी में है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, उमरेठ उपचुनाव के लिए 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि नामांकन प्रक्रिया 30 मार्च से 6 अप्रैल के बीच पूरी की जाएगी।
उमरेठ उपचुनाव में कांग्रेस का परंपरागत जनाधार, भाजपा की मजबूत संगठनात्मक पकड़ और आम आदमी पार्टी की आक्रामक रणनीति—तीनों के बीच कड़ा और त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।
यह चुनाव न केवल उमरेठ बल्कि पूरे गुजरात की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
अश्विन अग्रवाल





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