मथुरा, विशेष संवाददाता
मथुरा स्थित केएम विश्वविद्यालय में दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर भव्य शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सुरमयी संध्या ने पूरे परिसर को भक्ति और भारतीय संस्कृति के रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि देवी सिंह (डीएम), कुलपति डॉ. एनसी प्रजापति, कुलसचिव डॉ. पूरन सिंह, परीक्षा नियंत्रक समीक्षा भारद्वाज एवं मेडिकल प्राचार्य डॉ. पीएन भिसे द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कुलसचिव डॉ. पूरन सिंह ने प्रख्यात शास्त्रीय गायिका सुनंदा शर्मा के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुनंदा शर्मा का जन्म हिमाचल प्रदेश के शांत वातावरण में हुआ और उन्होंने बचपन से ही अपने पिता पंडित सुदर्शन शर्मा से संगीत की शिक्षा प्राप्त की।

आगे चलकर उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से शास्त्रीय संगीत में स्वर्ण पदक प्राप्त किया और पद्म विभूषण से सम्मानित महान गायिका गिरिजा देवी की शिष्या बनीं। उन्हें किशन महाराज और बिस्मिल्लाह खान जैसे महान कलाकारों का आशीर्वाद भी मिला।
सुनंदा शर्मा ने ख्याल, ठुमरी, दादरा और चैती जैसी विधाओं में अपनी प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने भक्ति संगीत के अंतर्गत “पायो जी मैंने राम रतन धन पायो” और “रघुपति राघव राजा राम” जैसे भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी।
उनकी प्रस्तुति में रागों के श्रृंगार और विरह भावों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।
अपने संबोधन में सुनंदा शर्मा ने कहा—
“जीवन में सफलता के लिए ध्यान केंद्रित करना अत्यंत आवश्यक है। संगीत मानसिक तनाव और अवसाद को दूर करने का सबसे सरल माध्यम है।”
उन्होंने छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए संगीत को अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम में हारमोनियम पर पंडित सुमित मिश्रा और तबले पर पंडित गोपाल मिश्रा ने उत्कृष्ट संगत देकर प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।
कार्यक्रम के अंत में कुलपति और कुलसचिव द्वारा सुनंदा शर्मा को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कुलपति डॉ. एनसी प्रजापति ने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं।
इस अवसर पर स्पिक मैके की शैफाली मल्हौत्रा, डीन डॉ. अजय प्रकाश, डॉ. पीताम्बर सिंह, प्रो. डॉ. अशोक कुमार, खेल निदेशक आरके शर्मा, डिप्टी रजिस्ट्रार सुनील अग्रवाल सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना। केएम विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम भारतीय परंपरा और कला को जीवंत बनाए रखने की दिशा में सराहनीय प्रयास हैं।
रिपोर्ट: प्रेम सिंह कुंतल, गुजरात प्रवासी न्यूज़, मथुरा




