मथुरा। विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर केएम विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के बाल रोग विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुलपति, मेडिकल प्राचार्य, चिकित्सक, छात्र एवं ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के परिजनों ने भाग लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।


इस दौरान पोस्टर प्रदर्शनी के विजेताओं—विराट, देवश्री, वंश, उत्कर्षा, युगान्ध्र और सानिकाका—को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही ऑटिज्म जागरूकता पर आधारित वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया।
बाल रोग विभाग की ओपीडी में 3 अप्रैल से 10 अप्रैल तक निःशुल्क परामर्श शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें मरीज विशेषज्ञों से मुफ्त सलाह ले सकेंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कुलपति डॉ. एन.सी. प्रजापति ने कहा कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि सोचने और समझने का एक अलग तरीका है। ऐसे लोगों को सहानुभूति नहीं, बल्कि सम्मान और स्वीकार्यता की आवश्यकता है।


मेडिकल प्राचार्य डॉ. पी.एन. भिसे ने कहा कि संस्थान ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को बेहतर उपचार और प्रारंभिक हस्तक्षेप प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ऑटिज्म एक न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसके लक्षण बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं, जैसे आंखों में संपर्क कम होना, बोलने में देरी और एक ही गतिविधि को बार-बार दोहराना।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ ताल्यान ने कहा कि समाज में जागरूकता और स्वीकार्यता बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि ऑटिज्म से जुड़े लोगों को बराबरी का अधिकार मिल सके।
रिपोर्ट: प्रेम सिंह कुंतल, गुजरात प्रवासी न्यूज, मथुरा

