मथुरा में 24 मार्च को विश्व क्षय दिवस (World TB Day) के अवसर पर केएम विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के क्षय रोग विभाग द्वारा तीन दिवसीय व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य समाज में टीबी जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना और इसे जड़ से खत्म करने के लिए लोगों को प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के पहले दिन एक भव्य जनजागरूकता रैली एवं मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति किशन चौधरी ने हरी झंडी दिखाकर किया। खास बात यह रही कि उन्होंने स्वयं भी डॉक्टरों, यूजी-पीजी विद्यार्थियों और सैकड़ों एमबीबीएस छात्र-छात्राओं के साथ दौड़ में भाग लेकर लोगों का उत्साहवर्धन किया।
इसके पश्चात विश्वविद्यालय परिसर में “हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं (Yes! We Can End TB)” थीम पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने टीबी उन्मूलन पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ डा. गोपाल बाबू गर्ग एवं कुलपति डा. एनसी प्रजापति उपस्थित रहे। क्षय रोग विभाग के चिकित्सकों द्वारा अतिथियों का पारंपरिक रूप से शॉल ओढ़ाकर, श्रीराधाकृष्ण की प्रतिमा और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डा. आरपी गुप्ता, एडीशनल मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डा. नमित गौतम, मेडिकल प्राचार्य डा. पीएन भिसे तथा नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डा. एमके तनेजा सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।

इस दौरान आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता और नुक्कड़ नाटक में छात्रों ने टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही बॉयोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डा. दिनेश कुमार, मेडिसिन विभाग के सीनियर रेजिडेंट डा. निशांत मलिक और स्त्री रोग विभाग की सीनियर रेजिडेंट डा. ऐश्वर्या त्रिपाठी को भी प्रशस्ति पत्र एवं शील्ड देकर सम्मानित किया गया।
👉 कार्यक्रम का एक अहम पहलू रहा – 50 टीबी मरीजों को पोषण बैग का वितरण। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है।
मुख्य अतिथि डा. गोपाल बाबू गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि टीबी के मरीजों को नियमित रूप से जांच कराते रहना चाहिए, जिसमें वजन, हीमोग्लोबिन और बलगम की जांच शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि मरीजों को समय पर दवा का सेवन करना अत्यंत आवश्यक है, तभी यह बीमारी पूरी तरह खत्म हो सकती है। साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा टीबी मरीजों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी।
वहीं कुलपति डा. एनसी प्रजापति ने कहा कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है। इसलिए समय पर पहचान और उपचार ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले लोग टीबी के इलाज के लिए अस्पताल आने से डरते थे, लेकिन अब सरकार के प्रयासों और जागरूकता के कारण स्थिति में काफी सुधार आया है और देश टीबी उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
👉 कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि समाज, स्वास्थ्य विभाग और सरकार मिलकर प्रयास करें, तो 2030 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकता है।
👉 कुल मिलाकर, यह आयोजन न केवल जागरूकता फैलाने में सफल रहा, बल्कि समाज को स्वास्थ्य के प्रति सजग और जिम्मेदार बनने का मजबूत संदेश भी दे गया।
रिपोर्ट: प्रेम सिंह कुंतल
गुजरात प्रवासी न्यूज, मथुरा

