कानपुर। शास्त्री नगर स्थित श्रीरामलला गोपाल मंदिर में चल रही 24वीं श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस कथा व्यास आचार्य पं. मनोज शुक्ला ने चरित्र की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिसका चरित्र महान है, उसे किसी अन्य धन की आवश्यकता नहीं होती।
मंदिर के महंत 1008 बलरामदास जी महाराज ने बताया कि कथा के दौरान व्यास जी ने भक्तों को समझाया कि धन से कोई महान नहीं बनता, बल्कि भगवान के नाम का स्मरण, उपकार, दया, विनम्रता और सरलता ही मनुष्य को चरित्रवान बनाती है। उन्होंने कहा कि चरित्र ही मनुष्य का सबसे बड़ा धन है।
उदाहरण स्वरूप व्यास जी ने भक्त प्रह्लाद का उल्लेख करते हुए बताया कि हिरण्यकश्यप ने उन्हें विष दिया, अग्नि में डलवाया और पर्वत से गिरवाया, फिर भी भगवान के नाम स्मरण के प्रभाव से उनका कुछ भी अनिष्ट नहीं हुआ। उनका तेज और अटूट श्रद्धा ही उनकी शक्ति थी।
उन्होंने यह भी कहा कि तेज और चरित्र ही महानता का प्रतीक है। वशिष्ठ और विश्वामित्र का उदाहरण देते हुए बताया कि तेजबल के कारण विश्वामित्र ब्रह्मर्षि कहलाए।
भगवान श्रीराम को तेज और आदर्श चरित्र का सर्वोच्च उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका जीवन मर्यादा और सत्य का प्रतीक है। इसी प्रकार भक्त ध्रुव ने अपनी अटल भक्ति और चरित्र से ध्रुव तारा के समान अमिट स्थान प्राप्त किया।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कीर्तन व आरती में भाग लिया।
📍 रिपोर्ट: किशोर मोहन गुप्ता
गुजरात प्रवासी न्यूज़, कानपुर

