रुड़की, हरिद्वार (उत्तराखंड) | गुजरात प्रवासी न्यूज़
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) रुड़की में समग्र शिक्षा के तहत प्राथमिक शिक्षा अंतर्गत उत्तरा मॉड्यूल पर आधारित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का पाँच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस प्रशिक्षण में लक्सर और नारसन क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों ने प्रतिभाग किया। कुल 212 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों ने उत्तरा मॉड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण प्राप्त किया।


समापन अवसर पर राज्य स्तरीय समन्वयक अखिलेश डोभाल ने कार्यकत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जन्म से लेकर प्रारंभिक पाँच वर्षों की अवधि के लिए एक समेकित और आधारभूत पाठ्यक्रम के विकास और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल देती है। इसी दिशा में उत्तरा मॉड्यूल का निर्माण किया गया है, जिससे को-लोकेटेड आंगनवाड़ियों में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के लक्ष्यों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।


उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण साहित्य बाल वाटिका कक्षा के बच्चों के मनोविज्ञान के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें रोचक और प्रभावी गतिविधियों को शामिल किया गया है, ताकि कक्षाएं केवल पढ़ाई का माध्यम न होकर आनंदमय सीखने का केंद्र बन सकें।


कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सरस्वती पुंडीर ने बताया कि पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के नीतिगत और विकासात्मक आधार, खेल आधारित अधिगम, पाठ्यचर्या के उद्देश्य, दक्षताएं, सीखने के प्रतिफल, समावेशी शिक्षा, बाल वाटिका में समुदाय की सहभागिता, सुरक्षा जागरूकता तथा आंगनवाड़ी केंद्रों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
इसके साथ ही आधारभूत साक्षरता के छह आयामों और आधारभूत संख्या ज्ञान के अंतर्गत संख्या पूर्वधारणा, वर्गीकरण, पैटर्न, संख्या पहचान और संख्या लेखन जैसे विषयों पर भी कार्यकत्रियों ने विभिन्न गतिविधियों का निर्माण कर एलटीएम (Learning Teaching Material) के माध्यम से सुंदर प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनीता नेगी ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि उत्तरा मॉड्यूल के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां बाल वाटिका कक्षाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगी, जिससे बच्चों में आधारभूतस्तर पर सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाते हुए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।
इस दौरान संदर्भदाता वंदना और सरोज बाला ने कार्यकत्रियों के सामने रोचक गतिविधियों का प्रदर्शन भी किया। कार्यक्रम में प्रेरणा, गीता, कमलेश, विशाखा, रूबी, हीना, दीपा, सरिता, मधुबाला, कमला, ऊषा, शबनूर और शबनम सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
रिपोर्ट:
डॉ. आलोक कुमार द्विवेदी
गुजरात प्रवासी न्यूज़, हरिद्वार

