संवाददाता / अहमदाबाद
अहमदाबाद में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन: व्यंग, वीर रस और जन सरोकारों की गूंज
अहमदाबाद। शहर के मंगल पांडे हॉल में आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी सशक्त रचनाओं के माध्यम से समसामयिक मुद्दों, जन समस्याओं और बदलते राजनीतिक परिदृश्य पर तीखे और प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय एकता समिति के तत्वावधान में महेंद्र यादव, उदयवीर सिंह भदौरिया और कवि मनन कुमार के संयोजन में किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मंच संचालक एवं हास्य-व्यंग्य कवि दिनेश बावरा ने अपने चुटीले अंदाज में की। ऐतिहासिक संदर्भ जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि “ईडी तब भी होती थी, जब कवि सम्मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे प्रधानमंत्री उपस्थित रहते थे,” इस टिप्पणी पर सभागार ठहाकों और तालियों से गूंज उठा। वर्तमान समय में सरकारी एजेंसियों की कार्यशैली पर व्यंग्य के माध्यम से उन्होंने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।
सम्मेलन की खासियत यह रही कि कवियों ने पक्ष-विपक्ष की सीमाओं से ऊपर उठकर आम जनता से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और टैरिफ जैसे विषयों पर भी व्यंग्य प्रस्तुत किए गए। एक कवि ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा, “जिनपिंग से मिले तो जितनी आंख खुलती है, उतना ही हाथ खोलता हूं,” वहीं पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के संदर्भ में बदलती नीतियों और संबंधों पर चुटीले व्यंग्य सुनाए गए।
देश की राजनीति भी कवियों के निशाने पर रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली को “हर भाषा समझने वाला नेता” बताते हुए व्यंग्य किया गया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी व्यक्तिगत और राजनीतिक संदर्भों में हास्य-व्यंग्य प्रस्तुत किए गए।
वीर रस के कवि कर्नल वी.पी. सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी गई है, जिससे जवानों की आवश्यकताओं को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि युद्ध में हानि की संभावना रहती है, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों और दुश्मन को हुए नुकसान को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा सैनिकों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा का भी उल्लेख किया।
हास्य-व्यंग्य के साथ-साथ सामाजिक रिश्तों और पारिवारिक जीवन पर भी कवियों ने अपने विचार रखे। एक कवि ने कहा, “जीवन में एक ऐसा दोस्त जरूर होना चाहिए जो सब समझता हो, क्योंकि पत्नी अक्सर पति को और मां बेटे को अलग नजरिए से देखती है,” इस पंक्ति पर श्रोताओं ने खूब सराहना की।
सम्मेलन में वीर रस, श्रृंगार और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं का प्रभावी प्रस्तुतिकरण हुआ। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज और व्यवस्था पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी कवियों और उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। पूरे आयोजन के दौरान श्रोताओं की सक्रिय भागीदारी और उत्साह देखने लायक रहा।
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