अहमदाबाद शहर में Ahmedabad Municipal Corporation (AMC) के उत्तर ज़ोन स्थित स्टेट खातां विभाग का एक RTI जवाब अब चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। आवेदक का आरोप है कि डिप्टी एस्टेट ऑफिसर द्वारा मांगी गई जानकारी का स्पष्ट, बिंदुवार और अभिलेख आधारित उत्तर देने के बजाय मात्र एक ही पंक्ति को दो बार दोहराकर जवाब भेज दिया गया।
क्या मांगी गई थी जानकारी?
सूत्रों के अनुसार RTI आवेदन में Renovation अनुमति से संबंधित स्वीकृति प्रक्रिया, दस्तावेज़ों की प्रतियां और विभागीय अनुमोदन का विवरण मांगा गया था। यह जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा मानी जाती है और इसे उपलब्ध कराने में कोई कानूनी बाधा नहीं होनी चाहिए थी।
कैसा मिला जवाब?
आवेदक का कहना है कि विभाग की ओर से जो लिखित उत्तर दिया गया, उसमें न तो मांगी गई जानकारी का स्पष्ट उल्लेख किया गया और न ही संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रति संलग्न की गई। इसके स्थान पर एक सामान्य पंक्ति को दो बार लिखकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। इससे यह आशंका पैदा हो रही है कि या तो रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था या जानकारी देने से बचने का प्रयास किया गया।
कानून क्या कहता है?
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7(1) के अनुसार लोक प्राधिकरण को निर्धारित समय सीमा में स्पष्ट, सटीक और अभिलेख आधारित सूचना देना अनिवार्य है। यदि सूचना अपूर्ण, भ्रामक या जानबूझकर रोकी जाती है तो धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील और धारा 20 के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि दोहराव वाला और अस्पष्ट उत्तर अधिनियम की भावना के विपरीत माना जा सकता है। RTI का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, न कि औपचारिक जवाब देकर प्रक्रिया को समाप्त करना।
आगे क्या?
यदि विभाग की ओर से स्पष्ट और पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो आवेदक उच्च प्राधिकारी या राज्य सूचना आयोग में अपील कर सकता है। इस प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सभी विभाग सूचना अधिकार कानून का पालन गंभीरता से कर रहे हैं या नहीं।
यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।
ब्यूरो चीफ
गुजरात प्रवासी न्यूज़, अहमदाबाद