(अश्विन अग्रवाल )
64 साल बाद कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक 8 से 9 अप्रैल तक अहमदाबाद के सरदार पटेल राष्ट्रीय स्मारक में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक का थीम “न्याय पथ: संकल्प, समर्पण, संघर्ष” रखा गया है, जिसके जरिए पार्टी 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में गुजरात को अपना “पावर स्टेशन” बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
गुजरात: राजनीति का प्रयोगशाला और कांग्रेस की नई उम्मीद
गुजरात को हमेशा से आजादी की लड़ाई से लेकर दिल्ली की सत्ता तक का रास्ता माना जाता रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को नजरअंदाज करने की गलती कांग्रेस को इतनी भारी पड़ी कि 60 साल तक सत्ता में रही यह पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। नरेंद्र मोदी ने गुजरात मॉडल को आधार बनाकर तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला। अब कांग्रेस गुजरात को “रोल मॉडल” बनाकर अपनी वापसी की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि बिहार, बंगाल, केरल जैसे राज्यों के साथ गुजरात में सफलता 2029 में सत्ता की कुंजी हो सकती है।
CWC बैठक: सरदार पटेल स्मारक से गांधी स्मृति तक
यह बैठक सरदार पटेल राष्ट्रीय स्मारक में होगी, जो ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके ठीक सामने 18 मार्च 1922 को महात्मा गांधी को शाही बाग स्मृति भवन में देशद्रोह के पहले मुकदमे में 6 साल की सजा सुनाई गई थी। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता इस स्मृति स्थल पर दंडवत प्रणाम करने जा सकते हैं। इस पर अंतिम फैसला पार्टी स्तर पर चर्चा के बाद लिया जाएगा।
दो दिवसीय इस कार्यक्रम में पहले दिन देश के विभिन्न राज्यों के मुद्दों और गुजरात मॉडल पर चर्चा होगी। लोकसभा 2024 के परिणामों के बाद कांग्रेस की स्थिति पर भी मंथन होगा। इसके साथ ही “न्याय पत्र: संकल्प, समर्पण, संघर्ष” के तहत नया राजनीतिक कैलेंडर लॉन्च किया जाएगा, जिसका मकसद पार्टी को फिर से मजबूत करना है।
राहुल गांधी का गुजरात जीतने का संकल्प
पवन खेड़ा ने बताया कि राहुल गांधी ने 2017 और 2019 के चुनावों के बाद गुजरात में कांग्रेस को मजबूत करने का संकल्प लिया था। इसी मकसद से देश भर से 2000 डेलिगेट्स, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और कार्यकर्ता अहमदाबाद पहुंच रहे हैं। सरदार पटेल मार्ग और साबरमती रिवरफ्रंट के तट पर होने वाले इस आयोजन के बाद महात्मा गांधी आश्रम में संध्या प्रार्थना का भी कार्यक्रम होगा।
गुजरात में 30 साल के BJP शासन पर सवाल
गुजरात प्रदेश कांग्रेस प्रमुख शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि बीते 30 सालों से भाजपा के शासन से गुजरात की जनता परेशान है। उन्होंने कहा, “गुजराती अस्मिता शासन से ज्यादा न्याय और गौरव में निहित है। नर्मदा आंदोलन इसका उदाहरण है, जब कांग्रेस के मुख्यमंत्री ने विपक्ष के नेता को हेलीकॉप्टर में साथ लेकर अस्मिता की लड़ाई लड़ी थी।” गोहिल ने CWC बैठक को गुजरात में बदलाव की शुरुआत करार दिया।
2014 का इतिहास और 2029 का लक्ष्य
भाजपा ने कांग्रेस को 2014 में , सत्ता से बेदखल कर नरेंद्र मोदी को दिल्ली की कुर्सी पर बिठाया था। अब कांग्रेस इसे उलटने की कोशिश में है। गुजरात को केंद्र में रखकर पार्टी 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव में मजबूत वापसी की योजना बना रही है। इस बैठक को कांग्रेस की नई रणनीति का आधार माना जा रहा है।
18 मार्च 1922 को, महात्मा गांधी को अहमदाबाद के शाही बाग स्थित सर्किट हाउस में एक ऐतिहासिक मुकदमे के बाद 6 साल की सजा सुनाई गई थी। यह मुकदमा, जिसे “द ग्रेट ट्रायल ऑफ 1922” के नाम से जाना जाता है, ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ गांधीजी के अहिंसक प्रतिरोध और उनके लेखन के कारण शुरू हुआ था। उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत राष्ट्रद्रोह का दोषी ठहराया गया, जो सरकार के प्रति “विश्वासघात” या “असंतोष फैलाने” से संबंधित था।
इस मुकदमे की शुरुआत गांधीजी की गिरफ्तारी से हुई, जो 10 मार्च 1922 को साबरमती आश्रम में हुई थी। गिरफ्तारी का कारण उनके द्वारा संपादित साप्ताहिक पत्र “यंग इंडिया” में प्रकाशित तीन लेख थे, जो 29 सितंबर 1921, 15 दिसंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को छपे थे। इन लेखों—”टैंपरिंग विद लॉयल्टी”, “द पजल एंड इट्स सॉल्यूशन”, और “शेकिंग द मानेस”—में गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की थी और लोगों से असहयोग आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया था। ब्रिटिश सरकार ने इन लेखों को सरकार के खिलाफ “असंतोष भड़काने” वाला माना।
18 मार्च को, सर्किट हाउस में जिला और सत्र न्यायाधीश सी.एन. ब्रूमफील्ड की अदालत में सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष का नेतृत्व एडवोकेट जनरल जे.टी. स्ट्रैंगमैन ने किया, जबकि गांधीजी ने अपना बचाव स्वयं किया। उन्होंने अदालत में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि वे सरकार के प्रति असंतोष फैलाने के दोषी हैं और इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी बताया। गांधीजी ने अपने बयान में कहा, “मैं यह मानता हूं कि सरकार के प्रति असंतोष फैलाना मेरा जुनून बन गया है… मेरे लिए यह नागरिक का सर्वोच्च कर्तव्य है।” उन्होंने ब्रिटिश शासन को भारत के लिए हानिकारक ठहराया और रोवलट एक्ट, जलियांवाला बाग नरसंहार, और आर्थिक शोषण जैसे मुद्दों का जिक्र किया।
न्यायाधीश ब्रूमफील्ड ने गांधीजी को एक “असाधारण व्यक्ति” के रूप में सम्मान देते हुए भी कानून के तहत उन्हें 6 साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, गांधीजी ने इस सजा को सहर्ष स्वीकार किया और कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है। सजा के बावजूद, वे केवल दो साल जेल में रहे, क्योंकि 1924 में स्वास्थ्य कारणों (एपेंडिसाइटिस ऑपरेशन) से उन्हें रिहा कर दिया गया।
यह मुकदमा न केवल गांधीजी के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी एक प्रतीक बन गया, जिसने अहिंसा और सत्याग्रह के उनके दर्शन को और मजबूत किया।
गुजरात प्रवासी न्यूज़ अहमदाबाद
8 अप्रैल 2025


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