(रजनीश पाण्डेय)
भारत के व्यापारिक केंद्र के रूप में सूरत को स्थापित करने के लिए नीति आयोग ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है। एक साल के अध्ययन और रिसर्च के बाद तैयार किए गए इस प्लान में कुल 54 बड़े प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं जिनमें टूरिज्म, टेक्सटाइल, डायमंड, केमिकल, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि सेक्टर में बड़े बदलावों की योजना बनाई गई है।
सूरत को चीन के गोंजाऊ की तरह बी2बी (बिजनेस टू बिजनेस) हब बनाने के लिए एक विशेष योजना बनाई गई है वहीं दुबई जैसा बी2सी (बिजनेस टू कंज्यूमर) मॉडल भी तैयार किया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स के तहत सूरत को भारत का “गेटवे ऑफ ट्रेड” यानी व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है।
क्या होगा इसमें खास?
B2B मॉडल (गोंजाऊ जैसा):
किराना बाजार, हॉस्पिटलिटी और मॉल्स, बिजनेस होटल्स, हाउसिंग प्रोजेक्ट्स, शटल सर्विस, मेट्रो, हेलीपैड सहित सीमलेस कनेक्टिविटी।
लोकेशन: एरिवा
प्रोजेक्ट कॉस्ट: 2000 एकड़ में 1 बिलियन डॉलर
B2C मॉडल (दुबई जैसा):
शॉपिंग स्ट्रीट्स, मॉल्स, आर्टिसन विलेज, म्यूज़ियम, रेस्टोरेंट्स और होटल्स, शटल सर्विस, मेट्रो और सभी आवश्यक सुविधाएं।
लोकेशन: ड्रीम सिटी
प्रोजेक्ट कॉस्ट: 310 एकड़ में 3 बिलियन डॉलर
वहीं इस मास्टर प्लान के तहत सरकार और कॉर्पोरेशन दोनों मिलकर सूरत को व्यापारिक दृष्टि से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सूरत के बारे में कहा था कि सूरत में टेक्सटाइल, केमिकल और इंजीनियरिंग से जुड़ी उद्योगों का तेजी से विकास किया जाएगा। उनका उद्देश्य है कि सूरत को एक ऐसा शहर बनाया जाए जिसका वैश्विक असर हो और शानदार कनेक्टिविटी हो।
इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और RFP टेंडर भी तैयार किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं के सफल होने के बाद सूरत व्यापार के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो जाएगा।
सब एडिटर रजनीश पाण्डेय सूरत गुजरात प्रवासी अहमदाबाद


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