संवाददाता: आश्विन अग्रवाल | अहमदाबाद
अहमदाबाद नगर निगम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगी है। रखियाल–सरसपुर वार्ड से जिग्नेश मेवाणी के करीबी कमलेश कटारिया को टिकट दिए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब गुटबाज़ी, विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच चुका है।
कटारिया को पूर्व पार्षद मंगल सूरजकर की जगह उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के स्थानीय नेतृत्व में असंतोष है। वरिष्ठ नेता हिम्मत सिंह पटेल और विधायक शैलेश परमार की पसंद अलग बताई जा रही थी, लेकिन हाईकमान के फैसले ने समीकरण बदल दिए।
हिम्मत सिंह पटेल ने संवाददाता से बातचीत में कहा,
“हम चाहते थे कि संगठन से जुड़े पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता को मौका मिले। लेकिन पार्टी का जो निर्णय है, उसका सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। हां, कार्यकर्ताओं में असंतोष है, इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
वहीं शैलेश परमार ने भी संकेत दिए कि निर्णय सर्वसम्मति से नहीं हुआ। उन्होंने कहा,
“स्थानीय समीकरणों को समझना जरूरी होता है। जब कार्यकर्ताओं की राय अलग हो और निर्णय कहीं और से आए, तो असर ज़मीनी स्तर पर दिखता है।”
गुटबाज़ी से चुनावी गणित प्रभावित
स्थानीय स्तर पर कांग्रेस चार धड़ों में बंटी नजर आ रही है। एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
“हर गुट अपने-अपने उम्मीदवार को मजबूत करने में लगा है। इससे नुकसान पार्टी का ही होगा।”
मुस्लिम उम्मीदवार यास्मीन शेख को हिम्मत सिंह पटेल का समर्थन बताया जा रहा है, जबकि अर्चना मकवाना को शैलेश परमार का समर्थन मिल रहा है। इस बीच महेश ठाकोर खुद को इन गुटों से अलग रखने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थिति संभालने के लिए जिग्नेश मेवाणी को खुद हिम्मत सिंह पटेल के आवास पर जाकर मुलाकात करनी पड़ी। बाद में दोनों नेता एक साथ रैलियों में नजर आए, लेकिन अंदरूनी मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
कार्यक्रम में हंगामा, आरोप-प्रत्यारोप तेज
विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक चुनावी कार्यालय के उद्घाटन के दौरान शहर कांग्रेस अध्यक्ष सोनल पटेल के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले तीखी बहस हुई और फिर मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इस घटना में वार्ड की महिला कांग्रेस अध्यक्ष भावना गुप्ता का नाम सामने आया है।
भावना गुप्ता ने बातचीत में गंभीर आरोप लगाए,
“मुझसे टिकट के बदले पार्टी फंड के नाम पर पैसे मांगे गए थे। मैंने एक लाख रुपये टोकन के तौर पर दिए थे। जब टिकट नहीं मिला तो पैसे भी वापस नहीं किए गए।”
हालांकि, सोनल पटेल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा,
“ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं और मेरी छवि खराब करने के लिए लगाए गए हैं। पार्टी में अनुशासन सबसे ऊपर है, इसलिए कार्रवाई की गई है।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि भावना गुप्ता और उनकी बेटी को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है, जबकि गुप्ता ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि वे अभी भी सक्रिय कार्यकर्ता हैं।
बागी उम्मीदवार का दर्द
टिकट न मिलने से नाराज़ होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे दिनेश पटेल ने भी अपनी नाराज़गी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा,
“मैं पिछले 40 साल से पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। हर बार उम्मीद रखी, लेकिन इस बार भी मौका नहीं मिला। इसलिए मजबूर होकर चुनाव लड़ रहा हूं।”
उन्होंने घटना की निंदा करते हुए कहा,
“इस तरह की घटनाएं कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। स्थानीय और वफादार कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।”
रैली में विरोध, काले झंडे दिखाने की कोशिश
तनाव का असर जिग्नेश मेवाणी की रैली में भी देखने को मिला, जहां टिकट से नाराज़ कुछ कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाने की कोशिश की। हालांकि पुलिस और समर्थकों की मौजूदगी के चलते प्रदर्शनकारी काफिले तक नहीं पहुंच सके।
एक स्थानीय युवक ने बताया,
“नाराज़गी काफी है, लेकिन खुलकर सामने आने से रोका जा रहा है। अंदर ही अंदर विरोध बढ़ रहा है।”
जातीय समीकरण और ‘हॉट सीट’
रखियाल–सरसपुर वार्ड को इस बार अहम माना जा रहा है। यहां 25–27 हजार दलित और करीब 17 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दलित वोट एकजुट होते हैं, तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है—लेकिन गुटबाज़ी यह समीकरण बिगाड़ सकती है।
26 अप्रैल को मतदान
अहमदाबाद नगर निगम के सभी वार्डों में 26 अप्रैल को मतदान होना है। कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है, लेकिन मौजूदा हालात में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही आंतरिक एकजुटता को बनाए रखना है।
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