रिपोर्ट: प्रेम सिंह, गुजरात प्रवासी न्यूज, मथुरा
मथुरा। के.एम. विश्वविद्यालय के एसएम कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल रिसर्च द्वारा विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। इस वर्ष की थीम “पशु चिकित्सकः भोजन और स्वास्थ्य के रक्षक” रही, जिसमें पशु चिकित्सकों की समाज और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका को उजागर किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं कुलाधिपति किशन चौधरी ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सक केवल पशुओं के ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य और सुरक्षित खाद्य आपूर्ति के भी संरक्षक हैं। उन्होंने वेटरनरी कॉलेज को अपना सपना बताते हुए छात्रों को शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
संगोष्ठी में वेटरनरी क्लिनिक के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि दुनिया में लगभग 75% संक्रामक रोग पशु-जनित होते हैं, जिनमें रेबीज और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियां प्रमुख हैं। उन्होंने पशु चिकित्सकों को “पहली पंक्ति के योद्धा” बताया।
वहीं, वेटरनरी डीन डॉ. अजय प्रकाश ने पशु-आधारित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर जोर दिया। कुलसचिव डॉ. पूरन सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने की आवश्यकता बताई, जबकि कुलपति डॉ. एनसी प्रजापति ने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर कुलाधिपति द्वारा वरिष्ठ पशु चिकित्सक एवं प्रिंसिपल डा. पिताम्बर सिंह सहित पूरी चिकित्सकीय टीम को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अजय प्रकाश ने की, संचालन डॉ. नेहा सिंह ने किया तथा समापन डॉ. एसपी गोस्वामी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यक्रम में मेडिकल प्राचार्य डॉ. पीएन भिसे, डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. अनुज शर्मा, डॉ. गिरीश कुमार गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के सभी डीन, प्रोफेसर और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
यह संगोष्ठी न केवल पशु चिकित्सा क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पशु चिकित्सक देश की खाद्य सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।